Sunday, 16 July 2017

Bank exam preparation tips in hindi

बैंक एग्जाम की तैयारी करने के टिप्स | Bank exam preparation tips in hindi
Bank exam preparation tips in hindi आज के समय में हर युवा बैंक की नौकरी चाहता है. प्राइवेट सेक्टर की झंझट से दूर, वे सरकारी बैंक की नौकरी चाहते है. 2010 में आये आईटी सेक्टर में रिशेसन के बाद से सभी युवा घबरा गए है. इंजिनियर से लेकर आम ग्रेजुएट भी आज के समय में बैंक की नौकरी चाहता है. बैंक में काम करने का समय निश्चित होता है, साथ ही पेंशन, पीएफ के भी फायदे मिलते है. आजकल प्राइवेट सरकारी बैंक की भरमार है, जो आये दिन नयी भर्ती करते रहते है. दूसरी सरकारी नौकरी की तरह बैंक की नौकरी में भी अलग अलग पोजीशन, योग्यता, जॉब प्रोफाइल, सैलरी होती है. लेकिन फ्रेशर (fresher) के लिए केवल तीन प्रोफाइल है –
क्लर्क या सिंगल विंडो ऑपरेटर (SWO)
प्रोवेज्नरी ऑफिसर (PO)
स्पेशलिस्ट ऑफिसर
बैंक एग्जाम की तैयारी करने के टिप्स
Bank exam preparation tips in hindi
इन प्रोफाइल के लिए पीओ एग्जाम, क्लर्क एग्जाम, आईबीपीएस (IBPS) व RRB एग्जाम आयोजित किये जाते है. पीओ व क्लर्क एग्जाम के लिए साल में 2 बार परीक्षा होती है, जबकि स्पेशलिस्ट ऑफिसर के लिए साल में एक बार परीक्षा होती है. आप जब पेपर देना चाहते है, निश्चित कर तैयारी शुरू कर दें. बैंक के पेपर के ये सारे विषय कवर किये जाते है –
क्रमांक
बैंक पेपर में आने वाले सब्जेक्ट
1.
रीजनिंग
2.
एप्टीटूड (quantitative aptitude) या नुमेरिकल रीजनिंग
3.
कंप्यूटर ज्ञान
5.
सामान्य ज्ञान (general awareness)
6.
इंग्लिश
बैंक की तैयारी के लिए नीचे आपको विस्तार से बताया जा रहा है.
प्लान करें – तैयारी करने का पहला स्टेप है, आपको पहले अपनी जॉब प्रोफाइल सुनिश्चित करनी होगी. एग्जाम से जुड़ी सारी बातें ध्यान से पढ़ ले, और एग्जाम के फॉर्म भर कर, समय देखें कि कितना आपको तैयारी के लिए मिलता है. आपको ये भी प्लान करना होगा  कि आप बैंक की तैयारी खुद से करना चाहते हो, या किसी संसथान में जाकर इसकी तैयारी करना चाहते हो.
संस्थान में जाकर बैंक की तैयारी – बैंक की तैयारी के लिए आज अनेकों इंस्टिट्यूट हर शहर में मौजूद है, यहाँ तक की छोटे से छोटे गाँव शहर में ये आपको मिल जायेंगें. आप अपनी इच्छा के अनुसार इनका चुनाव कर सकते है. फीस जमा करने से पहले 3 दिन की डेमो क्लास लें, अगर पसंद आये तो ही आगे जाएँ. यहाँ की फीस 6 हजार से 10 हजार होती है. कोचिंग में हर हफ्ते टेस्ट होते है, जिससे आप अपनी तैयारी का आकलन कर सकते है.
बैंक की कोचिंग जाने के नुकसान –
बैंक की ये कोचिंग आज के समय में पैसा कमाने का जरिया बन गई है, पढाई के नाम पर सिलेबस किट आपको पकड़ा दिया जायेगा, और 1-2 सवाल क्लास में हल कराकर बाकि आपको सेल्फ स्टडी के लिए कहा जायेगा.
समय की बर्बादी
पैसों की बर्बादी
ध्यान भटकता है
कोचिंग वाले हमेशा यही बोलते है, कि वे आपको शोर्ट ट्रिक सिखायेंगें. लेकिन सही मानों तो शोर्ट ट्रिक से सही जबाब की संभावना बहुत कम होती है. सेल्फ ट्रिक आप अपने अभ्यास से ही सिख सकते है.
कोचिंग के टीचर को अगर सारी ट्रिक इतने अच्छे से आती है, तो बैंक में 40 हजार की नौकरी छोड़ वो 300-400 रूपए पर क्लास क्यों ले रहा है. दरअसल वो टीचर खुद बैंक की तैयारी कर रहा स्टूडेंट होता है, जिसका चुनाव नहीं होता है और वो कोचिंग शुरू कर देता है. कोचिंग के बहकावे में न आकर सेल्फ स्टडी में ध्यान लगायें.
सेल्फ स्टडी – बैंक की तैयारी खुद से घर पर भी की जा सकती है, इसके लिए आपको थोड़ी समझदारी और एक सही टाइम टेबल की जरुरत है. सेल्फ स्टडी के फायदे –
आप अपनी पढाई अपनी स्पीड के अनुसार कर सकते है. जिस विषय में आपको लगता है, अधिक समय की जरुरत है, उसे अधिक दें. इसके लिए आपको किसी से पूछना नहीं पड़ेगा.
आप अपनी पसंद का स्टडी मटेरियल पढ़ सकते है.
समय बचता है, जिसका उपयोग आप अपने कमजोर विषय में देकर कर सकते है.
सबसे महत्वपूर्ण, पैसों की भी वचत होती है.
सभी विषयों पर ध्यान दें – बैंक में जो विषय आते है, उसे उपर बताया गया है. आपको अपनी इच्छा अनुसार एक-एक सब्जेक्ट को समय देना, जो कठिन है, उसे अधिक, जो सरल है उसे कम. हर सब्जेक्ट की कैसे तैयारी करें, मैं आपको बताती हूँ –
रीजनिंग (reasoning) – यह बैंक के पेपर में मुख्य हिस्सा होता है. इसकी अच्छी पकड़ से आप अच्छे नंबर ला सकते है. पेपर के इस हिस्से में सवाल के 4 विकल्प होते है, जिसमें से एक चुनना होता है. इसमें रिश्तेदार, दिशा, आकृति के बारे में सवाल होते है. रीजनिंग में शोर्ट ट्रिक बहुत चलती है, जिसे आप अधिक प्रैक्टिस से सीख सकते है. रीजनिंग को हमेशा अकेले में, शांत माहोल में, एकाग्र होकर करना चाहिए. रीजनिंग की अनेकों किताब बाजार में उपलब्ध है, आप इन बुक या स्टडी मटेरियल की बुक से इसे करें.
एप्टीटूड (quantitative aptitude) या नुमेरिकल रीजनिंग – इसमें गणित से जुड़े सवाल आते है. इसके अंदर वर्ग, ज्यामिति, बीज गणित, अंक प्रणाली, अनुपात, प्रतिशत, ब्याज मूलधन से जुड़े सवाल, समीकरण आते है. इस सेक्शन को हल करने के लिए जरुरी है कि आपका मैथ्स अच्छा होना चाहिय. आप अगर स्कूल, कॉलेज में है, और साथ साथ बैंक की तैयारी कर रहें है, तो आप गणित विषय में तभी से अधिक ध्यान देने लगें. अगर बेस अच्छा होगा तो, गणित कभी कठिन नहीं लगता, बल्कि पसंदीदा सब्जेक्ट में शामिल हो जाता है. कॉमर्स, बायो, आर्ट्स वाले जिनने मैथ्स नहीं पढ़ा है, उन्हें यहाँ तकलीफ हो सकती है. लेकिन ये मुश्किल नहीं है. अगर आप सेल्फ स्टडी कर रहें है, तो आप इस सब्जेक्ट के लिए कोचिंग लगा सकते है, जिससे आपको आसानी होगी. मैथ्स के एक ही तरह के सवालों को अधिक से अधिक सोल्व करना शुरू करें.
इंग्लिश – बैंक के पेपर में इंग्लिश स्कोरिंग सब्जेक्ट होता है. अगर आपकी इंलिश अच्छी है, तो आप अधिक अंक लाकर बैंक का पेपर पास कर सकते है. बैंक के एग्जाम में अधिकतर लोग ऐसे होते है, जो इंग्लिश में ध्यान नहीं देते और सिर्फ पास होने जितना पढाई करते है. अगर आपकी इंग्लिश अच्छी है तो इससे आपको फायदा मिलेगा. आप इंग्लिश के लिए बैंक की कोचिंग में जा सकते है, जहाँ आप सिर्फ इंग्लिश भी पढ़ सकते है. बैंक के पेपर में इंग्लिश शब्द की मीनिंग, ग्रामर, पैराग्राफ आता था.
सामान्य ज्ञान (general knowledge) – बैंक के पेपर में सामान्य जागरूगता (general awarness) के बारे में भी सवाल आते है. इसमें राजनीती, व्यक्ति विशेष के बारे में, खेल, बाजार, कृषि के बारे में पुछा जाता है. करंट अफ्फैर के बारे में आता है. इसलिए पेपर के 6 महीने पहले से इस विषय पर भी विशेष ध्यान दे, न्यूज़, समाचार पत्र, बुक्स के द्वारा इसकी जानकारी हासिल करें. आप जरुरी बातों को नोट करते जाएँ, जिससे रिवीजन के समय पढने में आसानी होगी.
कंप्यूटर – आज के समय सारे काम कंप्यूटर में होते है, ऐसे में बैंक भी पीछे नहीं है. अब बैंक का सारा काम कंप्यूटर के द्वारा ही होता है, इसलिए परीक्षार्थी से कंप्यूटर से जुड़े सवाल किये जाते है. इसमें कंप्यूटर के बारे बहुत आसान, मामूली सवाल आते है, जिनकी बारे में थोडा बहुत पढ़ कर आप इसे समझ जायेंगें. यह भी स्कोरिंग सब्जेक्ट होता है.
एक्स्ट्रा प्रयास करें – आप तैयारी का कोई भी जरिया चुने, लेकिन खुद की अलग से तैयारी बहुत जरुरी होती है.
एग्जाम पैटर्न को समझें,
कम समय में ज्यादा से ज्यादा सवाल हल करें, आप स्टॉप वाच रखे, फिर देखें, कितने समय में आप कितने सवाल हल कर पा रही है.
रोज पढाई करे, इससे आपका आत्मविश्वास बढ़ेगा
जिस बैंक की परीक्षा आप देना चाहते है और जिस बैंक को आप ज्वाइन करना चाहते है, उसकी पूरी इन्फॉर्मेशन निकाल कर अच्छे से पढ़े.
पिछले सालों के पेपर सोल्व करें.
टाइम टेबल बनायें, रोज का रूटीन बनाकर उसे फॉलो करें
ऑनलाइन टेस्ट दें
जो दोस्त इसकी तैयारी कर रहें है, उनके साथ कभी कभी पढाई करें.
बैंक की तैयारी का हर कोई का अपना तरीका होता है, ये मैंने अपने अनुभव से शेयर किया है. अगर आपके पास कोई और इन्फॉर्मेशन है तो वो हमारे साथ साझा करें.

Friday, 14 July 2017

Geeta Phogat Biography in Hindi गीता फोगाट की जीवनी 

Geeta Phogat Biography in Hindi
गीता फोगाट की जीवनी
नाम – गीता फोगाट
जन्म – 15 दिसम्बर 1988 ,हरियाणा (बिलाली गांव)
पिता – महावीर सिंह फोगाट
माता – दया कौर
बहन – बबिता, रितु, संगीता
खेल – पहलवानी
उपलब्धि-
राष्ट्रमंडल खेलों में गोल्ड मेडल जीतने वाली पहली भारतीय महिला बन गयीं।
पहली भारतीय महिला पहलवान है जिन्होंने ओलम्पिक में क्वालीफाई किया।
इनके जीवन पर आधारित फिल्म दंगल बॉलीवुड की सफलतम फिल्मों में से एक है।
Geeta Phogat Success Story in Hindi
गीता फोगाट के संघर्ष और सफलता की कहानी
जन्म
हरियाणा के भिवानी जिले में एक छोटा सा गांव है, बिलाली। एक वक्त था जब इस गांव में बेटी का होना अभिशाप माना जाता था। बेटी के पैदा होते ही खुशियों की जगह दुःख का मातम छा जाता था। इतना ही नहीं लड़कियों का स्कूल जाना भी माना था। ऐसी परिस्थितियों के बीच 15 दिसम्बर 1988 में बिलाली गांव में गीता फोगाट का जन्म हुआ।
गीता फोगाट का बचपन
आज भी हमारे देश में केवल बेटों की चाह रखने वालों की कमी नहीं है। शुरुआत में कुछ ऐसी ही सोच गीता के माता-पिता की भी थी। बेटे की चाह में फोगाट दंपत्ति भी चार बेटियों के पिता बन गए, जिनमे गीता सबसे बड़ी हैं। लेकिन बाद में गीता के पिता महवीर सिंह फोगाट जी को एहसास हुआ कि बेटियां भी बेटों से कम नहीं होतीं और उन्होंने अपनी बेटियों को उस राह पे चलाने का फैसला कर लिया जिसके बारे में कोई सोच भी नहीं सकता था- वे गीता और उसकी बहनों को पहलवान बनाने में जुट गए।
गुड्डे-गुड़ियों से खेलने की उम्र में गीता को अपने पिता के संरक्षण में कठोर परिश्रम करना पड़ा। वे अपनी बहन बबिता के साथ भोर में दौड़ने जातीं और जम कर कसरत करतीं। इसके बाद अखाड़े में भी घंटों प्रैक्टिस करनी पड़ती थी जिसमे लड़कों से मुकाबले भी शामिल रहते थे।
पर इन सबसे कहीं कठिन था वहां के समाज को झेलना। आप खुद ही सोचिये जिस गाँव में लड़कियों को स्कूल जाने तक की छूट न हो वहां कोई लड़की पहलवानी करे तो क्या होगा? गीता की कुश्ती सीखने की बात सुनते ही गांव में हंगामा मच गया। सब तरफ उनकी आलोचना होने लगी। लेकिन महावीर सिंह फोगाट आलोचना की परवाह न करते हुए गीता को प्रशिक्षण देने लगे।
गीता को कुश्ती के दांव-पेंच सीखता देख एक बिगडैल लड़की समझा जाने लगा। गांव के बाकी लोगों ने अपनी बेटियों को गीता से मेल-जोल बढ़ाने से मना कर दिया।
लोग कहते-
देखो कितना बेशर्म पिता है। बेटी को ससुराल भेजने के बजाय उससे कुश्ती लड़वाता है।
इस पर महवीर फोगाट जी एक ही जवाब देते…और वो जवाब हम सबको भी अच्छी तरह समझ लेना चाहिए –
जब लड़की प्रधानमन्त्री बन सकती है तो पहलवान क्यों नहीं बन सकती???
इस तरह से गीता फोगाट का बचपन बहुत संघर्ष भरा रहा। पर कहते हैं ना –अगर इरादें मजबूत हो और हौसले बुलंद हो तो दुनियां की कोई भी ताकत आप को आगे बढ़ने से नहीं रोक सकती है।
गीता और उसके पिता को भी कोई नहीं रोक पाया और आग चल कर गीता ने कुश्ती में वो कीर्तिमान स्थापित किये जैसे आज तक किसी भारतीय महिला ने नहीं कायम किये थे।

पिता को था यकीन बेटी बनेगी एक सफल पहलवान
साल 2000 के सिडनी ओलंपिक में जब कर्णम मल्लेश्वरी ने  वेट लिफ्टिंग में  कांस्य पदक जीता तो वह ओलंपिक में पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला बन गयीं। इस जीत का गीता के पिता महावीर सिंह फोगाट पर गहरा असर हुआ उन्हें लगा जब कर्णम मल्लेश्वरी मैडल जीत सकती है तो मेरी बेटियां भी मैडल जीत सकती हैं। और यहीं से उन्हें अपने बेटियों को चैंपियन बनाने की प्रेरणा मिली।
इसके बाद ही उन्होंने गीता-बबीता को पदक जीतने के लिए तैयार करना शुरू कर दिया। महावीर जी ने कसरत से लेकर खाने-पीने हर चीज के नियम बना दिए और गीता-बबीता को पहलवानी के गुर सिखाने लगे।
सत्यमेवजयते प्रोग्राम में गीता-बबिता आमिर खान के साथ

गीता के पिता 80 के दशक के एक बेहतरीन पहलवान थे और अब वह गीता के लिए एक सख्त कोच भी थे।
गीता बताती हैं,  “पापा मुझसे अक्सर कहते थे कि तुम जब लड़कों की तरह खाती-पीती हो, तो फिर लड़कों की तरह कुश्ती क्यों नहीं लड़ सकती ? इसलिए मुझे कभी नहीं लगा कि मैं पहलवानी नहीं कर सकती।”
गीता की असल ज़िन्दगी Vs दंगल मूवी – 5 अंतर
मूवी में दिखाया गया है कि महावीर जी बेटा चाहते थे पर असल ज़िन्दगी में उनकी पत्नी को बेटे की चाहत थी.
फिल्म में कोच को बतौर विलेन दिखाया गया पर हकीकत में ऐसा कुछ भी नहीं था.
मूवी में दिखाया गया कि गीता ने कॉमन वेल्थ गेम्स से पहले कोई बड़ा टूर्नामेंट नही जीता पर वे पहले ही Commonwealth Wrestling Championship, 2009 में गोल्ड जीत चुकी थीं.
फिल्म के क्लाइमेक्स में जो फाइनल मैच को बहुत संघर्षपूर्ण दिखाया गया, जबकि उस मैच को गीता ने बड़ी आसानी से 1-0, 7-0 से जीत लिया था.
फाइनल मैच के दौरान महावीर जी को एक कमरे में बंद दिखाया गया, जबकि उन्होंने स्टेडियम में बैठ कर गीता को गोल्ड जीतते हुए देखा था.
गीता फोगाट का कुश्ती का सफर
गाँव के दंगल से आगे बढ़ते हुए गीता ने जिला और राज्य स्तर तक कुश्ती में सभी को पछाड़ा और नेशनल व इंटरनेशनल मुकाबलों के लिए खुद को तैयार करने लगीं।
गीता कहती है कि -“उन्होंने हमेशा मुझे इस बात का एहसास कराया कि मैं लड़कों से कम नहीं हूँ। गांव वालों को बेटियों का पहलवानी करना कत्तई पसंद नहीं था। लेकिन पापा ने कभी उनकी परवाह नहीं की।”
महवीर जी की कोचिंग और गीता की कड़ी मेहनत का ही परिणाम था कि जालंधर में –
2009 में राष्ट्रमंडल कुश्ती चैपियनशिप में गीता ने स्वर्ण पदक जीता।
इसके बाद गीता ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा और कुश्ती का अपना सफर जारी रखते हुए
साल 2010 में दिल्ली के राष्ट्रमंडल खेलों में फ्री स्टाइल महिला कुश्ती के 55 Kg कैटेगरी में गोल्ड मेडल हासिल किया। और ऐसा करने वाली वो पहली भारतीय महिला बन गयीं।
साल 2012 में इन्होंने एशियन ओलंपिक टूर्नामेंट में गोल्ड मेडल जीतकर इतिहास रच दिया।
Related: मलाला युसुफजई : एक ऐसी लड़की जिसने तालिबान को झुका दिया
जीत का असर
बिलाली हरियाणा के उन टिपिकल गाँवों में आता है जो जन्म से पहले ही बेटी की भ्रूण हत्या के लिए बदनाम हैं। और ऐसे गाँव की बेटी होने के बावजूद गीता ने जो किया वो किसी करिश्मे से कम नहीं है। कॉमन वेल्थ गेम्स में गोल्ड मैडल जीत कर जब गीता पहली बार गाँव पहुंची तो वही लोग जो कभी उसे ताना मारने से नहीं थकते थे बैंड बाजे और फूलों का हार लेकर खड़े थे। गीता की जीत ने  गाँव वालों की दकियानूसी सोच को भी हरा दिया था।
यहाँ तक की गीता की दादी जो लड़की के जन्म को बोझ समझती थीं अब कहती हैं-
ऐसी बेटियां भगवान सौ दे दे तो भी कम है।
अब बिलाली ही नहीं हरियाणा के सैकड़ों गाँव बदल चुके हैं…अब यहाँ बेटियों को लोग प्यार करने लगे है। बेटी के जन्म पर जश्न मनाएं जाते है और लड़कियों को भी लड़कों की तरह खेलने-कूदने और घूमने की आजादी दी जाने लगी है। इतना ही नहीं गीता फोगाट के जीवन पर आधारित फिल्म दंगल  को भारतीय दर्शको ने अपनी सर-आँखों पर तो बैठाया ही, इस फिल्म ने चीन में भी 1200 करोड़ कमाकर इतिहास रच दिया है।
अंतर्राष्ट्रीय खेलों में गीता के योगदान को देखते हुए ही 18 अक्टूबर 2016 में इन्हें हरियाणा पुलिस का डिप्टी सुपरिनटेन्डेंट बनाया गया।
गीता एक मिसाल
दंगल मूवी में महावीर सिंह फोगाट का एक डायलॉग है-
सिल्वर जीतेगी तो आज नहीं तो कल लोग तन्ने भूल जावेंगे,अगर गोल्ड जीती तो मिसाल बन जावेगी। और मिसाले दी जाती है बेटा भूली नहीं जाती।
सचमुच गीता ने गोल्ड जीतकर एक मिसाल कायम कर दी। आज पूरे देश को अपनी इस बेटी पर गर्व है। महावीर सिंग फोगाट और गीता कुमारी के सफलता की ये कहानी करोड़ों हिन्दुस्तानियों के लिए प्रेरणा का विशाल स्रोत है। ये कहानी साबित करती है कि चाहे कितनी भी मुश्किलें आएं अगर इंसान के अन्दर दृढ इच्छा शक्ति है तो वह उसके बल पर असंभव को भी संभव बना सकता है।
अगर आपका भी कोई सपना है जो आज असम्भव लगता है तो उसे संभव बनाने में जुट जाइए…क्योंकि—
असम्भव कुछ भी नहीं…
Thanks
Babita Singh



Tuesday, 4 April 2017

Hindi Motivational Story

नामुनकिन कुछ भी नहीं – Wilma Rudolph Hindi Motivational Story
by HAPPYHINDI · October 1, 2014



 


नामुनकिन कुछ भी नहीं
Wilma Rudolph Hindi Motivational Story

“Nothing is Impossible”

विल्मा रुडोल्फ का जन्म अमेरिका के टेनेसी प्रान्त के एक गरीब घर में हुआ था| चार साल की उम्र में विल्मा रूडोल्फ को पोलियो हो गया और वह विकलांग हो गई| विल्मा रूडोल्फ केलिपर्स के सहारे चलती थी। डाक्टरों ने हार मान ली और कह दिया कि वह कभी भी जमीन  पर चल नहीं पायेगी।
विल्मा रूडोल्फ की मां सकारात्मक मनोवृत्ति महिला थी और उन्होंने विल्मा को प्रेरित किया और कहा कि तुम कुछ भी कर सकती हो इस संसार में नामुनकिन कुछ भी नहीं| विल्मा ने अपनी माँ से कहा ‘‘क्या मैं दुनिया की सबसे तेज धावक बन सकती हूं ?’’
माँ ने विल्मा से कहा कि ईश्वर पर विश्वास, मेहनत और लगन से तुम जो चाहो वह प्राप्त कर सकती हो|
नौ साल की उम्र में उसने जिद करके अपने ब्रेस निकलवा दिए और चलना प्रारम्भ किया। केलिपर्स उतार देने के बाद चलने के प्रयास में वह कई बार चोटिल हुयी एंव दर्द सहन करती रही लेकिन उसने हिम्मत नहीं हारी एंव लगातार कोशिश करती गयी| आखिर में जीत उसी की हुयी और एक-दो वर्ष बाद वह बिना किसी सहारे के चलने में कामयाब हो गई|
उसने 13 वर्ष की उम्र में अपनी पहली दौड़ प्रतियोगिता में हिस्सा लिया और सबसे अंतिम स्थान पर आई। लेकिन उसने हार नहीं मानी और और लगातार दौड़ प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेती गयी| कई बार हारने के बावजूद वह पीछे नहीं हटी और कोशिश करती गयी| और आखिरकार एक ऐसा दिन भी आया जब उसने प्रतियोगिता में प्रथम स्थान प्राप्त कर लिया।
15 वर्ष की अवस्था में उसने टेनेसी राज्य विश्वविद्यालय में प्रवेश लिया जहाँ उसे कोच एड टेम्पल मिले| विल्मा ने टेम्पल को अपनी इच्छा बताई और कहा कि वह सबसे तेज धाविका बनना चाहती है| कोच ने उससे कहा – ‘‘तुम्हारी इसी इच्छाशक्ति की वजह से कोई भी तुम्हे रोक नहीं सकता और मैं इसमें तुम्हारी मदद करूँगा”.
विल्मा ने लगातार कड़ी मेहनत की एंव आख़िरकार उसे ओलम्पिक में भाग लेने का मौका मिल ही गया| विल्मा का सामना एक ऐसी धाविका (जुत्ता हेन) से हुआ जिसे अभी तक कोई नहीं हरा सका था| पहली रेस 100 मीटर की थी जिसमे विल्मा ने जुता को हराकर स्वर्ण पदक जीत लिया एंव दूसरी रेस (200 मीटर) में भी विल्मा के सामने जुता ही थी इसमें भी विल्मा ने जुता को हरा दिया और दूसरा स्वर्ण पदक जीत लिया|
तीसरी दौड़ 400 मीटर की रिले रेस थी और विल्मा का मुकाबला एक बार फिर जुत्ता से ही था। रिले में रेस का आखिरी हिस्सा टीम का सबसे तेज एथलीट ही दौड़ता है। विल्मा की टीम के तीन लोग रिले रेस के शुरूआती तीन हिस्से में दौड़े और आसानी से बेटन बदली। जब विल्मा के दौड़ने की बारी आई, उससे बेटन छूट गयी। लेकिन विल्मा ने देख लिया कि दुसरे छोर पर जुत्ता हेन तेजी से दौड़ी चली आ रही है। विल्मा ने गिरी हुई बेटन उठायी और मशीन की तरह तेजी से दौड़ी तथा जुत्ता को तीसरी बार भी हराया और अपना तीसरा गोल्ड मेडल जीता।
इस तरह एक विकलांग महिला (जिसे डॉक्टरों ने कह दिया था कि वह कभी चल नहीं पायेगी) विश्व की सबसे तेज धाविका बन गयी और यह साबित कर दिया की इस दुनिया में नामुनकिन कुछ भी नहीं (Nothing is impossible)|